(a) इकाई–2 की स्थापित क्षमता 250 मेगावाट है और इसका वाणिज्यिक संचालन 23 दिसंबर, 2025 को प्रारंभ हुआ।
(b) इकाई–2 का उद्घाटन केंद्रीय विद्युत तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया गया।
(c) इकाई–2 के कमीशनिंग के साथ परियोजना की कुल स्थापित क्षमता 1,000 मेगावाट हो गई है।
(d) इकाई–2 के चालू होने से राष्ट्रीय ग्रिड की सहनशीलता (Grid Resilience) को मजबूती मिलने की अपेक्षा है।
उत्तर – (c)
व्याख्यात्मक उत्तर
- 23 दिसंबर, 2025 को केंद्रीय विद्युत तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने वर्चुअल माध्यम से 2000 मेगावाट (8×250 मेगावाट) क्षमता वाली सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना की इकाई–2 (250 मेगावाट) के वाणिज्यिक संचालन का उद्घाटन किया।
- इकाई–2 के कमीशनिंग के साथ परियोजना शीघ्र ही तीन और 250-250 मेगावाट की इकाइयों के संचालन की ओर अग्रसर है।
- शेष चार इकाइयों का चरणबद्ध कमीशनिंग 2026–27 के दौरान प्रस्तावित है।
- पूर्ण कमीशनिंग के बाद यह परियोजना भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय योगदान देगी और राष्ट्रीय ग्रिड की सहनशीलता को बढ़ाएगी।
- देश की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना के रूप में, सुबनसिरी लोअर परियोजना एक रन-ऑफ-द-रिवर योजना है, जिसमें छोटे जलाशय (पोंडेज) के साथ आठ हेड रेस टनल्स (HRTs) के माध्यम से पानी प्रवाहित कर प्रतिवर्ष 7,422 मिलियन यूनिट (MU) स्वच्छ बिजली उत्पादन का लक्ष्य है।
- इस परियोजना में उत्तर-पूर्व भारत का सबसे बड़ा 116 मीटर ऊँचा कंक्रीट ग्रैविटी बांध शामिल है, जो क्षेत्रीय अवसंरचना, ग्रिड सुदृढ़ीकरण, बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन में सहायक है।
- यह परियोजना अभियांत्रिकी उत्कृष्टता का उदाहरण है—इसमें भारत के सबसे भारी हाइड्रो जेनरेटर रोटर, सबसे बड़े स्टेटर और मुख्य इनलेट वाल्व, देश का सबसे बड़ा एग्रीगेट प्रोसेसिंग प्लांट, उच्चतम क्षमता का बैचिंग प्लांट तथा बांध कंक्रीटिंग में Rotec टॉवर बेल्ट का भारत में प्रथम उपयोग शामिल है।
- सुबनसिरी नदी पर बने पहले कैस्केडेड बांध के रूप में, यह 442 मिलियन घन मीटर के बाढ़ नियंत्रण के साथ बाढ़ को नियंत्रित करता है।
- एफआरएल पर कुल 1,365 मिलियन क्यूबिक मीटर भंडारण में से लगभग एक-तिहाई हिस्सा बाढ़ के समय खाली रखा जाता है, जिससे डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
- एनएचपीसी ने सुबनसिरी नदी के किनारों पर व्यापक तट संरक्षण एवं कटाव नियंत्रण कार्य किए हैं (30 किमी तक पूर्ण और 60 किमी तक विस्ताराधीन) जिस पर लगभग 522 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है।
- इससे पाँच वर्षों से अधिक समय से नदी तट स्थिर रहे हैं।
- साथ ही, आईआरएमए के सहयोग से सूकर पालन, रेशम उत्पादन और हथकरघा जैसे आजीविका कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 5,000 महिला किसानों को लाभ मिला है।
- यह परियोजना देश के 16 लाभार्थी राज्यों को बिजली आपूर्ति करेगी।
- अरुणाचल प्रदेश और असम को नि:शुल्क विद्युत आवंटन मिलेगा, जबकि उत्तर-पूर्व क्षेत्र को 1,000 मेगावाट बिजली प्राप्त होगी, जिससे क्षेत्रीय ऊर्जा उपलब्धता सुदृढ़ होगी।
- निर्माण चरण के दौरान प्रतिदिन लगभग 7,000 स्थानीय लोगों को रोजगार मिला, साथ ही ठेकेदारों, सेवा प्रदाताओं और स्थानीय बाजारों के माध्यम से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए।
