सीआरआईएसपीआर नवाचार और अनुवाद उत्कृष्टता केंद्र (सीओई-सीआईटी) की स्थापना हेतु समझौता

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प्रश्न – दिसंबर, 2025 में प्रस्तावित सीआरआईएसपीआर नवाचार और अनुवाद उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence for CRISPR Innovation and Translation – COE-CIT) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए –

COE-CIT का उद्देश्य सीआरआईएसपीआर जीन-संपादन तकनीक के माध्यम से प्रयोगशाला में विकसित जैव-चिकित्सकीय अनुसंधानों को नैदानिक और चिकित्सीय अनुप्रयोगों में परिवर्तित करना है।
यह केंद्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (JNCASR) और एक निजी जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप के बीच सार्वजनिक-निजी साझेदारी का उदाहरण है।
सीआरआईएसपीआर तकनीक केवल आरएनए (RNA) स्तर पर कार्य करती है और डीएनए (DNA) स्तर पर किसी भी प्रकार का जीन-संपादन नहीं करती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर – (a)
व्याख्यात्मक उत्तर
दिसंबर, 2025 में भारत में जैव-प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में एक नई और महत्वपूर्ण पहल के रूप में सीआरआईएसपीआर नवाचार और अनुवाद उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence for CRISPR Innovation and Translation – COE-CIT) की स्थापना के लिए आशय पत्र (Letter of Intent – LoI) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
यह केंद्र अत्याधुनिक सीआरआईएसपीआर जीन-संपादन तकनीक का उपयोग करते हुए प्रयोगशाला में होने वाले वैज्ञानिक अनुसंधानों को वास्तविक दुनिया के नैदानिक और चिकित्सीय अनुप्रयोगों में परिवर्तित करने के उद्देश्य से स्थापित किया जा रहा है।
सीआरआईएसपीआर तकनीक, जिसका पूरा नाम क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पैलिंड्रोमिक रिपीट्स है, आधुनिक जैव-विज्ञान की एक क्रांतिकारी खोज मानी जाती है।
यह तकनीक वैज्ञानिकों को डीएनए को अत्यंत सटीकता के साथ काटने, बदलने या हटाने की अनुमति देती है, जिससे आनुवंशिक रोगों के उपचार की नई संभावनाएँ खुलती हैं।
सीओई-सीआईटी की स्थापना एक ऐतिहासिक सार्वजनिक-निजी साझेदारी के अंतर्गत की जा रही है।
इसमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत बेंगलुरु स्थित स्वायत्त संस्थान जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर) तथा दिल्ली स्थित जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप क्रिसप्रबिट्स प्राइवेट लिमिटेड भागीदार हैं।
क्रिसप्रबिट्स जीन-संपादन तकनीक के माध्यम से किफायती और सुलभ निदान तथा उपचार समाधान विकसित करने के लिए जानी जाती है।
इस उत्कृष्टता केंद्र का मुख्य उद्देश्य प्रयोगशाला में विकसित दवाओं और जैव-चिकित्सकीय खोजों को सीधे रोगियों तक पहुँचाना है।
इसके लिए जेएनसीएएसआर की मूलभूत जैव-चिकित्सकीय विज्ञान में विशेषज्ञता और क्रिसप्रबिट्स की अनुप्रयुक्त जीन-संपादन एवं ट्रांसलेशनल प्लेटफॉर्म क्षमता को एक साथ जोड़ा जाएगा।
इसके साथ-साथ सीओई-सीआईटी को देश के जैव-प्रौद्योगिकी और नवाचार इको-सिस्टम को मजबूत करने वाले एक राष्ट्रीय मॉडल के रूप में भी देखा जा रहा है।
यह केंद्र अकादमिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच सहयोग को संस्थागत रूप प्रदान करेगा और भविष्य में ऐसे ही और सहयोगों के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।

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