
वॉटर प्यूरिफिकेशन सिस्टम
प्रश्न – रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित ‘सी वाटर डीसैलीनेशन सिस्टम (SWaDeS)’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। नीचे दिए गए विकल्पों में से बताइए कि कौन-सा तथ्य सही नहीं है।
(a) यह प्रणाली समुद्री जल और अत्यधिक खारे जल को पेय योग्य मीठे जल में परिवर्तित कर सकती है।
(b) इस प्रणाली को डीआरडीओ की डिफेंस लैबोरेटरी, जोधपुर द्वारा विकसित किया गया है।
(c) SWaDeS का केवल एक ही संस्करण विकसित किया गया है, जो इंजन आधारित है।
(d) यह प्रणाली तटीय क्षेत्रों, द्वीपों, रेगिस्तानी सीमाओं और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सैनिकों के लिए उपयोगी है।
उत्तर – (c)
व्याख्यात्मक उत्तर
- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने सैनिकों के लिए एक पोर्टेबल समुद्री-जल अलवणीकरण (Desalination) प्रणाली विकसित की है।
- यह प्रणाली समुद्री जल या अत्यधिक खारे जल को शुद्ध कर पेय योग्य मीठे पानी में बदलने में सक्षम है।
- इसे विशेष रूप से उन परिस्थितियों के लिए डिज़ाइन किया गया है जहाँ स्थायी जल आपूर्ति संभव नहीं होती।
- इस उपकरण का नाम सी वाटर डीसैलीनेशन सिस्टम (SWaDeS) रखा गया है।
- इस तकनीक को डीआरडीओ की डिफेंस लैबोरेटरी, जोधपुर द्वारा विकसित किया गया है।
- इस पोर्टेबल प्रणाली के दो प्रमुख संस्करण विकसित किए गए हैं।
- पहला, हाथ से संचालित (मैनुअल) संस्करण, जो हल्का, आसानी से ले जाने योग्य है और आपात स्थितियों में सीमित संख्या में सैनिकों की जल आवश्यकता पूरी कर सकता है।
- दूसरा, इंजन आधारित संस्करण, जो अधिक क्षमता वाला है और समुद्री जल में पाए जाने वाले अत्यधिक घुले लवणों (TDS) को सुरक्षित पेय मानकों के अनुरूप स्तर तक कम कर देता है।:
- यह प्रणाली तटीय क्षेत्रों, द्वीपीय इलाकों, रेगिस्तानी सीमाओं तथा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
- इससे सैनिकों की लॉजिस्टिक निर्भरता कम होती है और वे लंबे समय तक आत्मनिर्भर रूप से अभियान संचालित कर सकते हैं।
- साथ ही, यह तकनीक आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता अभियानों में भी उपयोगी सिद्ध हो सकती है।