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| सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर सिस्टम |
Q. 3 जनवरी, 2026 को भारतीय सेना द्वारा ‘सूर्यास्त्र मल्टी-कैलिबर रॉकेट लॉन्चर सिस्टम’ से संबंधित आपात खरीद (EP) अनुबंध के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। इनमें से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(a) यह प्रणाली पुणे स्थित निजी रक्षा कंपनी एनआईबीई लिमिटेड द्वारा विकसित की गई है।
(b) इस प्रणाली को इज़राइल की एलबिट सिस्टम्स के साथ तकनीकी सहयोग में विकसित किया गया है।
(c) यह प्रणाली अधिकतम 500 किमी तक की दूरी पर डीप-स्ट्राइक करने में सक्षम है।
(d) परीक्षणों में इसका सर्कुलर एरर प्रॉबेबल (CEP) पाँच मीटर से कम पाया गया है।
उत्तर – (c)
व्याख्यात्मक उत्तर
- 3 जनवरी, 2026 को भारतीय सेना ने अपनी आपात खरीद शक्तियों के तहत पुणे स्थित निजी रक्षा कंपनी एनआईबीई लिमिटेड के साथ लगभग 293 करोड़ रुपये के आपातकालीन खरीद (ईपी) अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।
- यह अनुबंध ‘सूर्यास्त्र मल्टी-कैलिबर रॉकेट लॉन्चर सिस्टम’ की आपूर्ति से संबंधित है, जिसे एनआईबीई लिमिटेड ने इज़राइल की एलबिट सिस्टम्स के साथ तकनीकी सहयोग में विकसित किया है।
- यह प्रणाली 150 किमी और 300 किमी तक की दूरी पर डीप-स्ट्राइक (Deep Strike) क्षमताओं के साथ अत्यंत सटीक सतह-से-सतह प्रहार करने में सक्षम है।
- परीक्षणों में इसका सर्कुलर एरर प्रॉबेबल (CEP) पाँच मीटर से कम दर्ज किया गया, जो इसे उच्च-स्तरीय प्रिसीजन स्ट्राइक हथियारों की श्रेणी में स्थापित करता है।
- यह प्रणाली एक साथ कई लक्ष्यों को भिन्न-भिन्न दूरी पर साधने में सक्षम है, जिससे युद्धक्षेत्र में कम समय में अधिक प्रभाव उत्पन्न किया जा सकता है।
- इस प्रणाली की सबसे उल्लेखनीय विशेषता इसकी लॉइटरिंग म्यूनिशन के साथ संगतता है।
- लगभग 100 किमी तक मार करने वाले कामिकाज़े ड्रोन को इससे जोड़ा जा सकता है, जिससे यह केवल रॉकेट लॉन्चर न रहकर मल्टी-डोमेन स्ट्राइक प्लेटफॉर्म बन जाता है।
- यह खरीद रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) द्वारा 26 दिसंबर 2025 को सक्रिय की गई आपात खरीद व्यवस्था के अंतर्गत की गई है।
